एबीबीवी (एबीबीवी इंक.) एक अग्रणी अनुसंधान-आधारित जैव-फार्मास्यूटिकल कंपनी है, जिसकी स्थापना वर्ष 2012 में एलिलिस एंड कंपनी के विभाजन के माध्यम से हुई थी। यह अपने पूर्ववर्ती, एबॉट लैबोरेटरीज़ के शोध-उन्मुख दवा व्यवसाय को अलग करके बनाई गई थी, जिसका इतिहास 1888 में डॉ. वॉल्टर एबॉट द्वारा शिकागो में स्थापित किया गया था। एबीबीवी का मुख्य मिशन मानव स्वास्थ्य को बदलने वाली नवीन चिकित्सा समाधानों के विकास, निर्माण और वैश्विक वितरण के माध्यम से गंभीर और जटिल रोगों के इलाज में क्रांति लाना है। कंपनी ने अपने आरंभ से ही वैज्ञानिक उत्कृष्टता, रोगी-केंद्रित नीतियों और नैतिक निर्माण प्रथाओं पर जोर दिया है। इसका मुख्यालय इलिनॉय राज्य के नॉर्थ चिकागो में स्थित है, और यह विश्व स्तर पर 100 से अधिक देशों में संचालित होती है। एबीबीवी का वित्तीय ढांचा अत्यंत मजबूत है, जिसमें लगातार उच्च अनुसंधान एवं विकास (R&D) व्यय, विस्तृत वैश्विक वितरण नेटवर्क और एक विविध राजस्व पोर्टफोलियो शामिल है, जो इसे जैव-दवा क्षेत्र में एक विश्वसनीय और लंबे समय तक टिके रहने वाले खिलाड़ी के रूप में स्थापित करता है।
एबीबीवी का उत्पाद पोर्टफोलियो चार प्रमुख चिकित्सा क्षेत्रों में केंद्रित है: ऑटोइम्यून रोग, ऑन्कोलॉजी, न्यूरोलॉजी/माइग्रेन और ओफ्थैल्मोलॉजी, साथ ही एस्थेटिक्स और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोगों के लिए उत्पाद भी शामिल हैं। इसके प्रमुख उत्पादों में स्कायरिज़ी (Skyrizi®), रिन्वोक (Rinvoq®), इम्ब्रूविका (Imbruvica®), वेंक्लेक्सा (Venclexta®), एलाहेरे (Elahere®), एपकिनली (Epkinly®), और एम्रेलिस (Emrelis®) शामिल हैं—जो सूजन, रक्त कैंसर, फेफड़ों के कैंसर और लिम्फोमा के इलाज में उन्नत जैव-थेरैपी प्रदान करते हैं। इसके अलावा, बोटोक्स कॉस्मेटिक®, जुवेडर्म कलेक्शन®, व्रेयलर®, यूब्रेल्वी®, क्यूलिप्टा®, ओज़ुर्डेक्स®, लुमिगन/गैनफॉर्ट, अल्फागैन/कॉम्बिगैन, मैवरेट®, क्रियन®, लिनज़ेस/कॉन्स्टेला और डुओडोपा जैसे उत्पाद विशिष्ट रोगी आबादी के लिए वैज्ञानिक रूप से सत्यापित, नैदानिक रूप से प्रभावी और विनियामक रूप से अनुमोदित समाधान प्रदान करते हैं। कंपनी ने एडवांस्ड बायोलॉजिकल प्लेटफॉर्म्स, एंटीबॉडी-ड्रग कंज़ुगेट्स (ADCs), जेनेटिक थेरैपीज़ और AI-संचालित ड्रग डिस्कवरी के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण निवेश किया है, जिससे यह अगली पीढ़ी की चिकित्सा तकनीकों के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रही है।
वैश्विक स्तर पर, एबीबीवी एक शीर्ष-5 जैव-फार्मास्यूटिकल कंपनी के रूप में स्थापित है, जिसका वार्षिक राजस्व 60 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है। इसके उत्पादों का लक्ष्य विश्व भर के करोड़ों रोगियों को है—विशेष रूप से ऑटोइम्यून रोगों से पीड़ित वयस्क, रक्त कैंसर के मरीज, माइग्रेन और पार्किंसंस के रोगी, ग्लॉकोमा और ड्राई आई के रोगी, तथा आईबीएस-सी और सीआईसी के रोगी। कंपनी का वितरण नेटवर्क उत्तर अमेरिका, यूरोप, जापान, चीन, भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका सहित विश्व के सभी प्रमुख क्षेत्रों में फैला हुआ है। भारत में, एबीबीवी ने अपने उत्पादों को भारतीय औषधि नियामक प्राधिकरण (CDSCO) के अधीन अनुमोदित कराया है और यहाँ एक विस्तृत चिकित्सक जागरूकता कार्यक्रम, रोगी सहायता कार्यक्रम और वैज्ञानिक सहयोग के माध्यम से अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही है। इसके वैश्विक विपणन और वितरण ढांचे के कारण, एबीबीवी के उत्पादों की पहुँच शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के रोगियों तक सुनिश्चित की जाती है।
भविष्य के लिए, एबीबीवी ने एक बहु-वर्षीय रणनीति की घोषणा की है जिसमें R&D पर वार्षिक 10 अरब डॉलर से अधिक का निवेश, 30+ उन्नत चिकित्सा उम्मीदवारों के क्लीनिकल विकास, और 2025–2030 के बीच 15+ नए उत्पाद लॉन्च शामिल हैं। कंपनी ने अपने ऑन्कोलॉजी पोर्टफोलियो को विशेष रूप से मजबूत करने के लिए एल्लीवियर थेरैप्यूटिक्स के साथ एक बड़े पैमाने के सहयोग की घोषणा की है, जिसमें एडवांस्ड ADC और T-सेल एंगेजिंग थेरैपीज़ का विकास शामिल है। इसके अलावा, एबीबीवी डिजिटल हेल्थ, टेलीमेडिसिन और रियल-वर्ल्ड डेटा के माध्यम से रोगी अनुभव को बेहतर बनाने पर काम कर रही है। यह भी घोषित किया गया है कि कंपनी अपने कार्बन उत्सर्जन को 2040 तक शून्य करने के लिए एक व्यापक स्थायित्व कार्यक्रम चला रही है। इसकी रणनीतिक दृष्टि न केवल वित्तीय विकास पर केंद्रित है, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी, नैतिक निर्माण, और वैश्विक स्वास्थ्य समानता को भी प्राथमिकता देती है।